अगर कोई मुझसे पूछे कि मैंने ज़िंदगी में क्या कमाया है,
तो शायद मैं किसी दौलत, किसी शोहरत या किसी उपलब्धि का नाम न लूँ।
मैं सिर्फ़ इतना कहूँगी
मैंने एक ऐसी दोस्त कमाई है,
जो इस स्वार्थ से भरी दुनिया में
मेरे हिस्से की सबसे अनमोल दौलत है।
वो मेरे सही में भी साथ खड़ी रहती है,
और जब पूरी दुनिया मुझे गलत ठहरा दे,
तब भी मेरा हाथ नहीं छोड़ती।
वो मेरे सामने मेरा हौसला-अफ़ज़ाई करती है,
और मेरी गैरमौजूदगी में भी
मेरे सम्मान की उतनी ही ईमानदारी से रक्षा करती है।
मेरे भीतर की अव्यवस्था,
मेरा पागलपन,मेरा गुस्सा,
मेरी जिद,मेरी चिड़चिड़ाहट...
वो सब देखती है,
फिर भी मुझे बदलने की नहीं,
समझने की कोशिश करती है।
मेरी एक मुस्कान के लिए
वो जितने छोटे-छोटे प्रयास करती है,
शायद उतना समर्पण
ज़िंदगी में बहुत कम लोगों से मिलता है।
लोग कहते हैं कि मैं उसके लिए बहुत खास हूँ,
पर सच तो ये है कि
मेरी दुनिया में अगर कोई रिश्ता
बिना किसी स्वार्थ, बिना किसी मुखौटे के साँस लेता है,
तो वो सिर्फ़ वही है।
ज़िंदगी ने मुझसे बहुत कुछ छीन लिया,
लेकिन उसके रूप में
एक ऐसा इंसान दे दिया,
जिसे खो देने का ख़याल भी
मेरे लिए किसी पूरी दुनिया के उजड़ जाने जैसा है।