पाखंडी
खुद को तुम इतना महान बताते
लोगों को दिन रात बहकाते
पाखंड की तुम अलख जगाते
जनता को मानसिक गुलाम बनाते ।
पर्ची देख तुम भविष्य बताते
चुटकी में बीमारी को दूर भागते
चूर्ण की पुड़िया देकर बेटा होगा विश्वास दिलाते
गरीबों से लूट कर पैसा अपने घर को महल बनाते।
तुम विलासिता का जीवन बिताते
लोगों को सादगी का पाठ पढ़ाते
अनपढ़ता का तुम पर्याय कहलाते
एक निरक्षर को झूठे मंत्र पढ़ बहलाते।
बुलबुल पाबड़ा