सपनों सा यह आसमान 🌸🌸
कल देखा एक सपना।
उस सपने में था अपना।
अपनों की इस दुनिया में।
न जाने क्यों उलझा मन मेरा।
कहीं अनकही पहेलियां है।
कहीं अनसुलझी कहानियाँ है।
कहीं इस भरी भीड़ में।
आसमान ही बस मेरा है।
देख सपनों सा यह आसमान।
मन में उमड़े नए अरमान।
छूलू सारा यह जहांन।
हर दिन बने मेरी पहचान।
दीप की कलम से✍️✍️