मैं कुछ ज्यादा ना कहूंगा तुम समझ लेना मैं खत आधा ही लिखूंगा तुम समझ लेना
की बाद तेरे मैं कैसा हूँ तुम अगर पूछो मैं हाल अच्छा ही कहूंगा तुम समझ लेना
है प्यार का दिन और तुझे गुलाब मिलेंगे ये देख कर जब मैं जलूँगा तुम समझ लेना
सब यार उस महफ़िल में रहेंगे 'तू' वाले और मैं जब तुमको 'तुम' कहूंगा तुम समझ लेना
की नज़्म मेरी पढ़ने में जो होती है मुश्किल ये सादगी से मैं लिखूंगा तुम समझ लेना
एक पीर ने दुआ दी की हर दुआ कुबूल हो अब क्या दुआ मैं करूँगा तुम समझ लेना
की दिल मेरा मुझे धीमे से ये कहता है मैं देख कर जिससे थमूँगा तुम समझ लेना
की तंग करते हैं कैसे कैसे ख़याल तेरे अब इससे ज्यादा न कहूंगा तुम समझ लेना
बात अधूरी ही मुझको क्यों पूरी लगती है मैं इश्क़ अधूरा जो करूँगा तुम समझ लेना...