Hindi Quote in Poem by Vandna Sharma

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विधवा जीवन

बहुत दुखी थी एक औरत
अपने शराबी पति से
पति निकम्मा और आवारा था
जब भी आता था घर, दुत्कारता था
घर की जिम्मेदारी से भागता था
जैसे-तैसे अपना और
बच्चों का गुजारा करती थी

फिर भी ना जाने क्यूँ
करवाचौथ का व्रत वो रखती थी
शायद उसे नई सुबह होने का इन्तजार था
या सच कुछ और था -
जैसा भी था वो उसका पति था
उसके सुहागिन होने का प्रमाण था
समाज के भटके-भटके लोगों के विरुद्ध
एक हथियार था

विधवा होने से तो सधवा भली
भले ही उसकी जिन्दगी नर्क हो चली
जानती थी वो अब ये रिश्ता सिर्फ नाम का था
अकेलापन उसे बहुत ही काटता था

फिर भी ना जाने क्यूँ
करवाचौथ का व्रत वो रखती थी
पति की लम्बी उम्र की दुआ करती थी
शायद जानती थी,
एक विधवा जीवन की मजबूरियां
डॉ वंदना शर्मा नई दिल्ली

Hindi Poem by Vandna Sharma : 112029538
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