“एक खाली कोने का नाम… तू”
मेरी ज़िंदगी में आज सब कुछ है,
मुस्कुराने की वजहें हैं, सपने हैं, खुशियाँ हैं…
फिर भी कहीं न कहीं एक शांत सा कोना खाली लगता है,
क्योंकि उस जगह पर आज भी सिर्फ़ तेरी यादें बसी हैं।
तू कब इतना खास बन गया,
ये मुझे भी कभी समझ नहीं आया…
लेकिन अब हर पल यही कहता है,
तेरे जैसा कोई और कभी मिला ही नहीं।
तू पास होकर भी कितना दूर है,
ये दूरी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती…
मुझे एहसास है कि शायद तुझे मेरी ज़रूरत है,
लेकिन तेरी खामोशी बहुत कुछ कह जाती है।
कभी-कभी लगता है,
हमारी ज़िंदगी एक-दूसरे के बिना अधूरी है…
फिर भी हम दोनों खामोश हैं,
जैसे दिल में सब कुछ है, पर होंठों पर कुछ भी नहीं।
हमारी वो आख़िरी मुलाकात…
आज भी मैंने दिल में वैसे ही संभाल कर रखी है।
वो अनकहे शब्द, वो अधूरी भावनाएँ,
सब कुछ आज भी वहीं ठहरा हुआ है।
तेरा यूँ चुपचाप बैठना भी,
मेरे लिए हज़ार शब्दों के बराबर है…
तू कुछ न कहकर भी,
तेरे दिल की बातें मुझे महसूस होती हैं।
मैं खुश हूँ, मेरी ज़िंदगी खूबसूरत है,
लेकिन उस खूबसूरती में एक छोटी सी कमी है…
वो कमी किसी चीज़ की नहीं,
वो सिर्फ़… तेरी है।
क्योंकि कुछ रिश्ते कभी खत्म नहीं होते,
वो बस खामोश हो जाते हैं…
और उस खामोशी में भी,
एक-दूसरे की कमी हर रोज़ महसूस होती रहती है।
- शब्दिका ✍️