जीवन के ९ क्षेत्र
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1. स्वास्थ्य
2. अभ्यास
3. व्यवसाय
4. संबंध
5. बच्चे
6. प्रोपर्टी
7. मान प्रतिष्ठा
8. आध्यात्मिक उन्नति
9. सेवा और अनुदान
इन 9 क्षेत्रों में प्रगति और उन्नति दायक कर्म करने की प्रेरणा देने वाले विचार और भाव को महत्व देना ही स्वस्थ मनोदशा है।
चेन,मस्ती,शांति, सुकून अगर निरंतर चाहिए तो यह समझ लेना चाहिए कि आपको दिन भर जो भी विचार आते है,वह स्वस्थ मनोदशा की दिशा में है या नहीं?
जिन भी विचार या भावों पर आप कर्म नहीं कर सकते और कहना चाहिए कि चेन,सुकून,मस्ती और प्रगति की दिशा में कर्म नहीं कर सकते तो वह सारे विचार,और भावों को महत्व देना ही तनाव और चिंता का कारण है। धीरे धीरे वह सारे बेकार विचार और चिंताएं आपके स्वास्थ्य पर प्रभाव देते है।
तो आज ही अपने विचार और भावनाओं पर फिल्टर लगाए।
चलिए इसे और आसान कर देते है।
दिन भर दिमाग में जो विचार आते है उसमें 80% विचार बेकार ही होते है, और उसमें भी 60% विचार पर कर्म भी नहीं किया जा सकता तो वह मात्र भूतकाल की स्मृति और भविष्य की कल्पना पर आधारीत है। बाकी 20% विचार छोटे मोटे दिन के काम और व्यवस्था के होते है।
जो भी बड़े और प्रगति दायक विचार है, जिस पर काम किया जा सकता है वह सिर्फ २०% है।
तो उस पर दिमाग की महत्वपूर्ण ऊर्जा लगाकर उसका विकास करना ही संतुलित जीवन का निर्माण करना है।