बहोत अजीब लड़की हूं मैं
अकेली रहती हु तो जिंदगी फीकी लगने लग जाती है
लोगो के साथ रहू तो सिर दर्द होने लग जाता है
खुश रहने की कोशिश करूँ तो future याद आ जाता है
मायूस रहने लग जाऊं तो जिंदगी जीने की ख्वाईश होती है
मैं खुद बात नहीं कर पाती...
और लोगों की बातों से irritate हो जाती हूं।
मैं तो कुछ नहीं सहती बोलकर सब सह लेती हूं।
मीठा खा कर तीखा खाने की आती है तो
तीखा खा कर मीठा खाने का मन करता है
कभी छोटी बात पर भी खुल कर हँस देती हूं तो
कभी बिना वजह रोने लग जाती हूं।
दिल से नर्म इतनी दूसरों के दुख को अपना मान लेती हूं तो कभी जरूरत पड़ने पर अपनों के लिए पत्थर भी बन जाती हूं।
बाहर घूमने का दिल करता है लेकिन घर से बाहर निकला नहीं जाता।
पता नहीं मैं किसी लड़की हूं।
✍️ अंतिमा 😊