ईश्वर के द्वार पर भेदभाव?
हे देव!
क्या आपके चरणों में भी अमीर-गरीब अलग हैं?
क्या आप पत्थरों में बसते हैं दाता?
क्या आप भी जात-पात देखकर डालते हैं,
भक्त पर अपनी कृपादृष्टि?
हे ईश्वर!
अगर यही है आराधना,
यही है पूजा,
तो मुझे नहीं करनी ऐसी पूजा।
हे देवता!
आप मेरी आत्मा में स्थापित हैं,
किसी मूर्ति या मंदिर में नहीं।
-श्री कृति