एक अधूरी तमन्ना
एक छोटी सी इच्छा इस दिल में दबी रह गई,
कि काश! हम भी उस चाँद की तरह चमकते,
और जब ये दुनिया हमें निहारती,
तो हम भी इन बादलों की ओट में छुप जाते।
देखकर चाँद की वो शांत और शीतल चमक,
हम भी धीरे से मुस्कुराया करते,
उसकी परछाई में अपना अक्स ढूंढते,
और उसकी हल्की सी गर्माहट से खिल जाया करते।
पर वक़्त के बादल आगे बढ़ गए,
रात और गहरी होती चली गई,
वो ठंडी चमक, वो हँसी, वो सुकून...
सब एक अधूरी ख्वाहिश बनकर आँखों में ही सो गई।