मालूम है उसके दिल में काफिरना है,
हमें फिर भी उसके दिल तक जाना है।
है मंजिल भी वही, रास्ता भी वही है,
उसी की आँखों में मुझे खो जाना है।
बेवजह नहीं है ये कश्मकश दिल की,
उसे पाना, या खुद को मिटाना है।
मोहब्बत में शर्त-ए-वफा तो यही है,
कि उसका हर सितम हँस के उठाना है।
वो जो देखे तो बहारें आ जाएँ राजेश
उसी की एक मुस्कान का दीवाना है।