मेरी कलम मेरी साथी
पेन, पेंसिल या कलम
नाम अनेक रूप अनेक
लेकिन काम तो सबका एक
बिना कलम के कहाँ भाव लिखे जाते हैं
बिना कलम के नहीं गीत लिखे जाते
" बच्चों की, बड़ों की सबकी साथी
बिना कॉपी, कागज के कैसे लिखे पाती
अब तक रही उपेक्षित
तरसती रही सम्मान के लिए
लिखती रही कलम
खुद को घिसती रही
श्रेय सारा ले जाते कवि
ना शुक्रिया ना आभार
कलम यही सोचती रही
कलम की ताकत से क्या सब अनजाने
की लाखों क्रान्ति, अनेक परिवर्तन
ना-ना हम तो कलम को पहचाने
प्यारा साथी माने,
धन्यवाद ऐ कलम तेरा
आभार तूने जो साथ निभाया
मेरी तन्हाई की साथी
कैसे तुझसे करे किनारा
दुनिया की भीड़ में, एक तू ही है सहारा
डॉ वंदना शर्मा पांडव नगर new delhi