तुम में और मुझमें सोचो क्या भिन्नता है
वो ही दिल जाने जिसका सब छिनता है,
पत्थर तो नहीं हैं, पर वो पत्थर ही हैं
दिल के टुकड़े इक तो नहीं सत्तर ही हैं
दिल तोड़ने वाला कब गिनती गिनता है!
तुम ही हो ना जिसने मुझे मारा है
ये जीवन नहीं, हाय! धिक्कारा है
मर ही गए हम जिस दिन छोड़ा था
टूट गया ये दिल तिनका तिनका है!