पछतावा कैसा होता है??
शायद कुछ ऐसा...
वो आज मेरी हर काश में है,
जो शायद मेरे पास हो सकती थी।
वो लड़ाइयाँ दूर कर गई,
जो महज़ अल्फ़ाज़ में हो सकती थीं।
अगर वो सुने तो आज भी,
तो बस उससे माफ़ी माँगनी है,
और मैं जानता हूँ उसे...
अगर ये माफ़ियाँ सही वक़्त पर होतीं,
तो माफ़ भी हो सकती थीं...
— अनकही ✍️