तड़पते दिल ने मेरे यही जाना है
सगरी दुनिया एक पागलखाना है
भटकते फिर रहे दिन रात
करे कोई ना दिल की बात
रोते रहा हूँ मैं जैसे कि पपीहा
सब्र अब किसको दिखाना है!
सगरी दुनिया एक पागलखाना है!
तड़प ले ऐ मेरे दिल तू भी जरा
बूंद के लिए तड़पे हिया यूँ पपीहा
बेमुरव्वत सी इस दुनिया में, ओ!
हर पग पर एक नई चोट खाना है
सगरी दुनिया एक पागलखाना है!
मैं भी मुसाफ़िर औ' तू भी मुसाफ़िर
करता है फिर कल की क्यों फिक्र
कब मजनू को लैला मिली है
दर बदर बस ठोकर खाना है!
सगरी दुनिया एक पागलखाना है!