गधा समझदार है कि आदमी
सोच बड़ी कि सोच में है कमी
क्योंकि गधा मारे दुलत्ती
आदमी लड़े क्यों हत्थी
अक्ल भी कभी कहाँ थमी!
होशियार हो रहा हर आदमी है
क्या दिमाग़ गधे सा लाजमी है
आसमान आसमान है जमीं जमीं!
नहीं भेड़ चाल चलना अच्छा है
तन पर ना बनियान ना कच्छा है
मैं क्या कहूँ सोच सोच की है कमी!