ये जो तुम भोग रहे हो — सुख हो या दुःख —
वह तुम्हारे ही कर्मों का परिणाम है।
कभी किसी के साथ छल करने का फल,
तो कभी किसी को सुख या पीड़ा पहुँचाने का असर।
इसलिए बार-बार किसी इंसान
या भगवान को दोष मत दो।
बस एक बार अपने भूतकाल में झाँक कर देखो,
अपने कर्मों का लेखा-जोखा समझ आ जाएगा।
ये कलयुग है जनाब...
यहां कर्मों का हिसाब चुकाए बिना
किसी को भी मुक्ति नहीं मिलती।