Hindi Quote in Poem by Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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गृहणी
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो । ?
घर मे सुबह का अलार्म मुझ से शुरु होता है ।
रसोई के नमक मिर्च से लेकर दूध हिसाब तक बताती है।
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो ?
सुई धागे से लेकर कपड़े पहनने है, धोने है। न पहने वाले कपड़े किसी को देने है. प्रेस तक का हिसाब बनाती है।
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो ?
घर के कोने से लेकर जमी धूल को साफ करना साज संवारना चार दीवारी घर का हिस्सा आरामदायक जो आप सुकून तक रोम रोम महक जाये
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो?
पूजा व्रत तप से लेकर रिवाजो त्योहारो को साल दर साल दोहराती हूं घर की शान्ति के लिए मन्दिर से लेकर शादी विवाह आदि प्रोग्राम से लेकर रिश्ता निभाती हूँ
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो ?
चेहरे पर मुस्कान लेकर हर दर्द छुपाकर . संस्कारी किसी घर की आयी बेटी बहू बन हर सितम उठाती हूँ परिवार के हर  व्यक्ति को सहजता महसूस हो
कहते हो  तुम घर मे करती ही क्या हो?
परिवार कर हर व्यक्ति अपने अपने समय पर घर से बाहर काम पर निकल जाते हैं मुझे घर का चौकीदार बना कर
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो?
जब दिन छुप जाता है सभी के आने का इंतजार करती हूँ
सही सलाहमती की दुआ करती हूँ अपने आप को छोडकर सब का ख्याल रखती हूँ
कहते हो तुम घर मे करती ही क्या हो?
दरवाजे के ताले से लेकर घर की लाइट बंद करती हूं मीठी नींद मे चैन से सो जाओ रात का अलार्म मुझ पर खत्म होता है।
कहते हे तुम घर मे करती ही क्या हो?






- Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Hindi Poem by Nandini Agarwal Apne Kalam Sein : 112026065
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