गम की रात ढली तो थी
हाँ खुशी मिली थी, अलविदा कहने के लिए
गम, दर्द,चंद सांसें हैं बस मेरे पास
इसके सिवा क्या है, जिन्दगी तुझे देने के लिए
तमाम घरों की देहलीज से बेअदबी से ठुकराये गये हैं
मैं आ गया हूं तेरे दर पे इक और ठोकर खाने के लिए
शाम तो ढल जाने दो कम से कम
मैं बुझ जाऊंगा, चिरागों को जलाने के लिए
हमें कल का तुफां सता कर चला गया
आज, आप आये हो हमें सताने के लिए
क्यूँ गैरों को मैं,तकलीफ दूँ इस तरह
मैं भागता हुआ था अपना जनाजा उठाने के लिए
पीछे मुड़कर नही देखा,कम से कम सोचा तो
इतना ही काफी है मेरे दिल को धड़काने के लिए
खिड़की से आती धुप को अपने घर में पनाह दी है
एक सबाब की खातिर, सबाब कमाने के लिए