2.. रावल खुमान : अरबों का काल
रावल खुमाण द्वितीय 9वीं सदी में मेवाड़ के गहलोत वंश के शासक थे जो अरब आक्रमणों के खिलाफ हिंदू धर्म की सबसे बड़ी ढाल बने। उन्होंने भीनमाल के राजा नागभट्ट के साथ मिलकर सेनापति हाशिम की सेना को हराकर अरबों को दशकों तक भारत से दूर रखा। उनकी सबसे बड़ी जीत अरब सेनापति अल मामू उर्फ महमूद के खिलाफ थी, जिसे उन्होंने युद्ध में हराकर बंदी बना लिया और भविष्य में आक्रमण न करने का प्रण लेकर ही छोड़ा।
खुमाण ने कश्मीर से रामेश्वरम तक 40 हिंदू राजवंशों को एकजुट करके एक विशाल सेना खड़ी की और अरबों को निर्णायक रूप से पराजित किया। उनके कारण भारत लगभग 500 वर्षों तक अरब आक्रमणों से सुरक्षित रहा। इतिहासकार मानते हैं कि अगर खुमाण हार जाते तो इस्लाम का प्रसार चीन और सुदूर पूर्व तक हो सकता था।
इतने बड़े योगदान के बावजूद खुमाण का नाम इतिहास से लगभग मिटा दिया गया। फिर भी मेवाड़ में आज भी लोग कहते हैं “थनै खुमाण राखै” यानी खुमाण तुम्हारी रक्षा करें। खुमाण का जीवन इस बात का प्रमाण है कि जब हिंदू राजा संगठित होते हैं तो कोई भी आक्रमण उन्हें रोक नहीं सकता।
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