“जब कृष्ण हमें चुनते हैं…”
“कहते हैं… जब Krishna किसी को चुनते हैं,
तो पहले उसे दुनिया से नहीं… खुद से मिलवाते हैं…”
वो हमें तोड़ते हैं… 💔
हमारे अहंकार को, हमारी झूठी उम्मीदों को,
उन रिश्तों को… जो सिर्फ नाम के होते हैं।
वो हमें अकेला करते हैं…
ताकि हम भीड़ में खोने की बजाय,
अपने अंदर की आवाज़ सुन सकें।
कई लोग छोड़कर चले जाते हैं…
कुछ रिश्ते बिखर जाते हैं…
और आखिर में बस 1–2 सच्चे लोग ही बचते हैं…
जो सच में हमारे होते हैं।
उस वक़्त लगता है सब खत्म हो गया…
पर सच में…
👉 वहीं से शुरुआत होती है ✨
क्योंकि जब सब छूट जाता है…
तब कान्हा खुद साथ पकड़ते हैं 💙
📿 श्लोक
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥”
(तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है,
फल की चिंता मत करो…)
🌼 संदेश
जब कृष्ण तुम्हें तोड़ते हैं…
तो सज़ा देने के लिए नहीं…
👉 तुम्हें तुम्हारी असली ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए 🚀
तुम्हें क्या करना है?
👉 विश्वास रखना
👉 धैर्य रखना
👉 अपने कर्म करते रहना
क्योंकि…
👉 “कृष्ण देर करते हैं… पर अंधेर नहीं”
👑 अंत
“जब दुनिया छोड़ देती है…
तब कृष्ण थाम लेते हैं…
और जिसे कृष्ण थाम लें…
उसे कोई गिरा नहीं सकता।” 💫