भटकती
आंखों की पुतली
एकाएक
बेमाप-बेखौफ
डगमग- डाँवाडोल सी
पीसीओ बूथ से
हेल्पलाइन नंबर मिलाने लगी
क्या यह नंबर वैध है?
यदि है !
तो सही समय पर यहां कभी
सुनी जाती क्यों नहीं सही बात कोई
या
कोलतारी नींद में मग्न हैं यहां भी सभी के सभी!
फोन की थरथराती देह
कंठ भरभरा पुतली को उलझा कहने लगी :
डगमग-डाँवाडोल को वैध
समझा भी गया है क्या कहीं?
या
वैध डगमगाते की बात
समझने का प्रयास करते हैं ही कभी?
© श्रीमयी (जंगली गुलाब)