"जॉन ऐलिया के लिए"
तुम ग़ज़लों की जान, जॉन,
ख़ामोशी में भी बयान, जॉन।
टूट कर भी हँसने का हुनर दिया,
तुम खुद में इक इम्तिहान, जॉन।
तुम्हारे हर मिसरे में खुद को पाया मैंने,
तुमसे मिलती है मेरी दास्तान, जॉन।
तुमसे ही सीखा है दर्द को लफ़्ज़ देना,
मगर नहीं है ये काम आसान, जॉन।
तुम्हें चाहने की सज़ा बस इतनी मिली,
तन्हाई को बना लिया पहचान, जॉन।
“कीर्ति” तो बस एक कतरा है दरिया का,
जाने तुम कितनी रूह की जुबान, जॉन।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️