वो हल्की सी टीस थी, मगर तूफ़ाँ बन गई,
दर्द की दास्ताँ बढ़ती गई आगे बढ़ते-बढ़ते।
हमने चाहा सुकून, मिला सज़ा की तरह,
ज़िन्दगी थक गई, मैं तुझसे लड़ते-लड़ते।
मेरी हर शायरी मेरे दर्द का बयां-ए-ग़म करती है,
तुम्हारी आँख ना भर आए दोस्तों पढ़ते-पढ़ते।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️