"ना हो मोहब्बत"
प्यार होगा, तो बातें भी होंगी,
छुप-छुप के मुलाक़ातें भी होंगी।
नज़रें मिलेंगी, दिल धड़केगा,
हर लम्हा किसी का साथ माँगेगा।
फिर कभी इकरार, कभी तकरार होगी,
चाहतें कभी बेशुमार होगी।
पर एक दिन ख़ामोशी हावी होगी,
राहें जुदा, और तन्हाई साथी होगी।
फिर दिल के टुकड़े हज़ार होंगे,
ख़्वाब सारे बेकार होंगे।
सोचती हूँ...
दिल टूटे ऐसी नौबत ही क्यों आए,
मैं चाहती ही नहीं कि मोहब्बत हो जाए।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️