"मलाल-ए-रात”
ऐ रात, तू क्यों उदास है,
सब कुछ तो तेरे पास है,
चाँद-ओ-तारे, सहरा-ए-बादल,
फिर किसकी तुझे तलाश है?
ऐ रात तू क्यों उदास है?
क्या तेरे सीने में कोई राज़-ए-निहाँ है,
या हिज्र का कोई ज़ख़्म-ए-जुस्तजूँ वहाँ है?
तेरी ख़ामोशी में क्यों सदा-ए-अहसास है,
ऐ रात, तू क्यों उदास है?
तेरे आँचल में सितारे चमकते हैं,
फिर भी तेरे साए ग़म ही बयाँ करते हैं।
क्या तन्हाई ने तुझे भी गिरफ़्तार किया है,
या किसी हुस्न-ए-इंतज़ार ने बेकरार किया है?
क्या तूने पहना तन्हाइयों का लिबास है
ऐ रात बता ना, तू क्यों उदास है?
Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️
सहरा-ए-बादल = बादलों का आकाश
राज़-ए-निहाँ = छुपा हुआ राज़
हिज़्र = जुदाई
ज़ख़्म-ए-जुस्तजूँ = इंतज़ार या तलाश की वजह से लगने वाला घाव
सदा-ए-अहसास = भावनाओं की आवाज
हुस्न-ए-इंतज़ार = खूबसूरत इंतज़ार