रोज़ सुबह ख्वाब बुनता हूँ ,
ख्वाबों में अपने आपको बुनता हूँ |
छोटे-छोटे हैं ,ख्वाब मेरे,
उदास चेहरे को ,खुशीयों से भर दूँ,
हारे हुए में हौसले भर दूँ |
जो मुझसे रूठ गए हैं,
उन्हें फिर से मना लू |
अगर, कुछ ना कर सकूँ तो,
कम से कम,
अपने ग़मों को कुछ देर के लिए,
भुला दूँ |
अपने ख्वाबों की तस्वीर को ,
हकीकत में बना लू |
बस छोटे-छोटे ख्वाब सजा लू|
नीर रस: