हमें जो कहानी प्रसूत की जाती है , वो सच में वैसी होती ही नहीं ।
आपको जानकर हैरानी होगी , 1857 से पहले भारतीय लोगों को पता ही नहीं था हम सब गुलाम है , क्यों कि फसल का होना , कर देना , अंग्रेजों द्वारा नौकरी देना , उनकी सुविधा अनुसार इलाके में विकास करना वो वैसा ही था जैसे आज की सरकार में होता है ।
ये सभी पद थे जो आज है ।
1857 की क्रांति से लेकर 1947 तक तो भारतीयों को समझाया गया हम गुलाम है , जो ये जीवन व्यतीत कर रहे है ये गुलामी की है ।
क्योंकि दादा , परदादा से लेकर सब ने उसी माहौल में जीवन गुजरा था ।
मेरा तो मानना है कि , जो हमें इतिहास परोसा गया वो ऊपर ऊपर का था , जो नीचे तेज आंच में जल गया वो हमें बताया ही नहीं गया ।