ये सच्ची कहानी है मेरी -
मै bsc math 2nd year paper में फैल था , मै पेपर देने के लिए जा रहा था ।
मैने हाथ दिया रिक्शा वाले को , उसमें सुंदर सी लड़की थी थोड़ी मोटी सी ,
ऐसे पूछा आप भी डिग्री क्लॉज में जा रहे हो ,
वो बोली " हा "
मैने पूछा कौनसा पेपर है आपका ,
तो बोली "math 2nd year" ।
मैने पूछा नाम -
तो महोत्रमा में एटिट्यूड 😁
बोले ना ,
देखा भी नहीं , है भगवान ,
मैने सोचा इतनी बेइज्जती 🙄
मै गया क्लास में, तो देखा वो लड़की
बिल्कुल मेरे बराबर वाली लाइन में,
मैने सोचा हो गया मूड खराब ।
अब हम फैल हुए थे सारे तो थे ही डफर सब 🤣
मैने लेकर गया पर्ची ,
जैसे ही 1 घंटा रहा , मैने अपना पिटारा खोल लिया ,
चारों तरफ मैने पर्ची ही पर्ची कर दी ,
अध्यापक ने आंखे मूंद ली 🤗😁🤣
मै जो पर्ची वाला सवाल करु आगे वाले लड़के को कभी पीछे वाले को सारी क्लास में पर्ची के दी ।
मै बन गया भगवान 🤣🤣
वो लड़की बोले , "हेलो मुझे भी दो ना "
मैने देखा भी नहीं ,
वो हर पर्ची पर " मुझे भी पर्ची दो ना "
मैने देखा ही नहीं , समय खत्म , तो बोली वो लड़की
मै फैल हो गई , तुम्हारे कारण ।
मै फिर भी नहीं बोला , मै हंसते हुए घर 🤣🤣🤣
क्या सिखा अपने -
कोई नाम पूछे तो बता देना चाहिए , वरना यहां कब कौन आपका नाम मिट्टी में मिला दे पता नहीं ।