Hindi Quote in Shayri by Kirti kashyap

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"रुह-ए-वस्ल की तलाश"

काश ये छोटा सा ख़्वाब मुक़म्मल हो जाए,
कोई मेरी तन्हा सी ज़िन्दगी में शामिल हो जाए।

इस शायरा की तिश्नगी है के कोई शायर हो,
फिर लिखें इक दूजे पे औ' ग़ज़ल हो जाए।

ए खुदा नवाज़िश होगी, निज़ात दिला दर्द से,
कोई मेरे जैसा हो और रूह-ए-वस्ल हो जाए।

फ़क़त मोतबर हो बस यही आरज़ू-ए-हयात है,
ये मुख़्तसर सी उलझन मेरी बस हल हो जाए।

आलम-ए-ज़ुहूर औ' दिलकश सी बस्तगी हो,
इश्किया का ये ख़ुमार फिर मुसल्सल हो जाए।

हर-सू मुनीर, बारिश की बूँदे औ' रुत-ए-बहारां,
फिर रफ़्तगी में दोनों आवारा बादल हो जाए।

कोई वाहिलाना मुहिब महबूब हो तो क्या बात हो,
"कीर्ति" जैसे वो भी ताइल हो तो मिस्ल हो जाए।

Kirti Kashyap "एक शायरा"✍️


मुक़म्मल – पूरा, सम्पूर्ण
तिश्नगी – प्यास, चाहत, तमन्ना
नवाज़िश – कृपा, मेहरबानी
निज़ात – मुक्ति, छुटकारा
रूह-ए-वस्ल – आत्मिक मिलन
फ़क़त – सिर्फ़, मात्र
मोतबर – भरोसेमंद, माननीय
आरज़ू-ए-हयात – जीवन की इच्छा
मुख़्तसर – छोटा, संक्षिप्त
आलम-ए-ज़ुहूर – प्रकट होने की स्थिति, हाज़िर होना
दिलकश – मोहक, सुंदर
बस्तगी – लगाव,
इश्क़िया – प्रेम-संबंधी
ख़ुमार – नशा, मदहोशी
मुसल्सल – लगातार, निरंतर
हर-सू – चारों ओर
मुनीर – रोशन, उज्जवल
रुत-ए-बहारां – बसंत ऋतु
रफ़्तगी – बेखुदी
वा’हिलाना – पागलों की तरह
मुहिब = मोहब्बत करने वाला
ताइल = काफ़िले से बिछड़ा हुआ
मिस्ल – समान, बराबर

Hindi Shayri by Kirti kashyap : 111992286
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