वो भी क्या दिन थे...
1. वो भी क्या दिन थे... (हमारी पीढ़ी)
कंचे, लट्टू, छुपन-छुपाई,
हर चीज़ में थी सच्ची लड़ाई।
पानी की बोतल सबकी होती,
पर प्यार से सबमें बाँटी जाती।
पढ़ाई के डर में सोते थे हम,
पर माँ की लोरी में खोते थे हम।
2. अब जो दिन हैं... (आज की पीढ़ी)
मोबाइल, गेम्स और ऑनलाइन क्लास,
बचपन कहीं खो गया है पास।
दोस्त स्क्रीन पे दिखते हैं बस,
आँखों से मिलने का ना रहा रस।
गूगल पर हर जवाब है हाज़िर,
पर रिश्तों में प्यार नहीं है ज़ाहिर।
3. आने वाले कल की बात करें...
रोबोट संग खेलेंगे बच्चे,
AI बताएगा उन्हें अच्छे-बुरे रस्ते।
इमोशन होंगे डिजिटल फॉर्मेट में,
माँ की ममता शायद एप्प में।
चाँद पर स्कूल, मंगल पर घर,
पर दिलों में शायद बढ़ेगा डर।