मेरे महकने से महकती है गुल-ए-महफ़िले,
मेरे चहकने से चहकती है पूरी सुनी बग़िया।
मेरे मुस्कुराने से रोशन हैं सारे अंधेरे,
मेरे गुनगुनाने से सजती हैं तन्हा गलियाँ।
मैं जो चल दूँ तो बहारें भी साथ चलें,
मैं जो रुक जाऊँ तो ठहर जाए हवा की रहगुज़र।
मैं जो देख लूँ तो निखर उठे हर पत्थर
मैं जो छू लूँ तो रंगीन हो जाए मंजर
मेरे ख्वाबों से जगती है उम्मीदों की रोशनी
मेरे होने से मुक्कलम है ये सारा सफर
मैं बादल बनू तो बारिश में भी राग बहे
मैं खुशबू बनू तो हर जमी पर इत्र चढ़े
मैं हूं सावल की पहली फुहार
मै हूं पतझड़ में छुपा प्यार
मै सूरज की सुनहरी किरण
जो बिखेरे सवेरा हर एक द्वार
मै बदलती ऋतुओं की पहचान
मै धरती की प्यारी मुस्कान
मै हूं वो खामोश एहसास
जो शब्दों से परे...फिर भी पास
कभी नदियों की रवानी हूं
कभी झरनों की तान
मै कुदरत की वो नज़्म हूं
जिससे सजा है ये जहान
ArUu ✍️