हम अपनी जिंदगी से कितने रूठे हुए है जब खुश रहते है तो लगता है सारा जहां झूम रहा है और जब दुख के पल आते है तो ऐसा लगता ये मेरे साथ ही क्यों हुआ । दुख या परेशानी को दूर करने के हम कितने प्रयास करते है और वह परेशानी दूर हो जाती है तो फिर हम उसी ले से जीवन जीने लगते है । कई बार इसके विपरीत होता लाख प्रयास करने पर भी वह परेशानी पीछा नहीं छोड़ती या फिर एक के बाद एक कुछ न कुछ परेशानी लगी रहती है मेरे साथ भी कुछ ऐसा होते आया है हम सबकी जंग अलग अलग होती हैं बहरहाल इन सभी के चलते मैने कुछ चीजें गहराई से समझी है। हर एक तरंग का , हर बात का हमारे जीवन में, हमसे जुड़े लोगों में यह तक की इस ब्रह्माण्ड के हर कण में उसका प्रभाव रह जाता है इसलिए जब भी हमारे जीवन में कोई घटना हो तो उसे संतुलित रूप से देखने का प्रयास करे और उसी तरह उससे निपटे। प्रकृति सभी कड़ों के आपस संयोजन से उनकी तरंगों से निरंतर आगे बढ़ते रहती है और इसका बढ़ना कोई रोक नहीं सकता। ये सतत बदलते रहती है और अपने आप को संतुलित करने का प्रयास करते रहती है इसी प्रकृति का एक छोटा सा हिस्सा हम है और हमारा इस दुनिया में चक्र, प्रकृति के जैसा ही चलते रहता है । जो हम कार्य करते है और साथ ही साथ किस तरह की भावनाएं साथ लेकर चलते है अपने लिए और औरों के लिए उन सभी के प्रभाव से ही आपका भविष्य चलता है या कुछ ऐसा कह लो हर घटना पर आप किसी प्रतिक्रिया करते है उसका प्रभाव केवल तब की घटना पर ही नहीं बल्कि आपके आने वाले समय पर भी पड़ता है । अगर हम ये समझ ले तो हम कभी दुखी नहीं होंगे और निरंतर बढ़ते रहेंगे।