दादी का दुलार भुला, बाबूल का प्यार भुला,
मोतियों की माला मेरी , आज तक न लाया है।
होली को मंग भुला , दिवाली उमंग भुला,
राखी का त्योहार बार-बार बिसराया है।
और भाभी मेरा भैया तो जन्म से भुलक्कड था ही ,
और आज भी उसी आदब को दोहराया है,
कि जाते हुए माता का आशीश लेने भुल गया,
आते हुए रण थल शीश छोड आया है।
😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭😭