"क्या ये सही है?"
पहली नज़र में ही लगा, तू वही है,
जिसे मैंने हर ख्वाब में ढूंढा कहीं है...
पर जब तू आया करीब,
दिल में उठा ये सवाल अजीब...
इस उमर में ये सोचना,
क्या ये सही है, क्या ये सही है...?
दिल जो चाहे, क्या ये वही है, क्या ये वही है...?
तेरी हर अदा मुझे भा जाए,
तेरी यादों में जागूं मैं रातें...
पर जब तुम आते हो सामने,
लग जाती हूँ तुमसे दूर कहीं भागने...
पसंद करना किसी को इतना,
क्या ये सही है, क्या ये सही है...?
दिल जो चाहे, क्या ये वही है, क्या ये वही है...?
तुझमें और मुझमें फ़र्क जैसे पूरब-पश्चिम में,
तू यहाँ, मैं वहाँ, जैसे कोई अलग जहाँ...
पर डर लगता है तुम्हें "ना" कहने से,
और दुनिया ताने मारेगी "हाँ" करने से...
दिल लगाना इस मोड़ पे,
क्या ये सही है, क्या ये सही है...?
दिल जो चाहे, क्या ये वही है, क्या ये वही है...?