तेरी यादों का सिलसिला
तेरी यादों का सिलसिला आज भी रहता है,
दिल के हर कोने में कुछ दर्द सा बहता है।
चाहतें जो अधूरी रहीं बीते मौसम में,
उनकी ख़ुशबू का एक असर आज भी रहता है।
जिस गली में तेरा नाम लबों पे आया था,
वहीं हर मोड़ पर अब सन्नाटा सा रहता है।
ख़त तेरे जो लिखे थे मोहब्बत के लहजे में,
वो अल्फ़ाज़ों में बिखरा अफ़साना सा रहता है।
तू कहीं और सही, चैन मुझको कब आया,
इश्क़ दिल में है मगर ज़ख़्म सा रहता है।
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