प्रकृति का प्रेम
हरा-भरा यह घना संसार,
नीला नभ, जग का आधार।
कल-कल बहती नदियों की धारा,
प्रकृति का गीत मधुर, न्यारा।
चमकते सूरज की स्वर्णिम किरण,
लाती है जीवन में नई उमंग।
चाँदनी रात का शीतल प्रकाश,
धरती को करता सुंदर उजास।
पत्तों की सरसराहट में गीत,
पक्षियों का गूँजता संगीत।
बहारों में फूलों की महक,
प्रकृति का प्रेम, जैसे मधुर चमक।
वृक्षों की छाया, शीतल बयार,
धरती का यह अमूल्य उपहार।
हरियाली ओढ़े यह सुंदर चादर,
प्रकृति का है यह अद्भुत स्वर।
हमको सिखाती प्रेम की भाषा,
सहिष्णुता और सादगी की आशा।
संभालो इसे, बचाओ इसे,
प्रकृति का प्रेम लौटाओ इसे।
यही है जीवन का सच्चा आधार,
प्रकृति से जुड़ो, यही है उपहार।
धरती, आकाश, नदियाँ, पहाड़,
प्रकृति का प्रेम है सबसे बड़ा प्रसाद।