Hindi Quote in Book-Review by Kishore Sharma Saraswat

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उपन्यास : जीवन एक संघर्ष
उपन्यासकार : किशोर शर्मा 'सारस्वत'
कुल भाग : 42, कुल पृष्ठ : 940
आज समीक्षा : भाग 14 की

कथानक : कविता के मामा-मामी रूठ कर गए, इस बात से उसकी मम्मी व्यथित थी लेकिन कविता को इस बात का कोई मलाल नहीं था।
माँ-बेटी के बीच का यह संवाद उन दोनों के विचारों के अंतर को रेखांकित कर गया जिसमें कविता घर-गृहस्थी के झंझट को पशु से बराबरी पर रखकर तोलती है। माँ की दृष्टि में सिविल सर्विसेज का मार्ग काँटो भरा है पर उसका मानना है कि शिक्षक के मामले में ऐसा नहीं है।
कविता का कहना है कि इस तर्क के पीछे उसकी मम्मी की बेटी को दूर न भेजने की भावना छिपी है।
बहरहाल, कविता का लिखित परीक्षा में चयन हो जाता है और वह इंटरव्यू के लिए दिल्ली जाने के लिए पिता के साथ ट्रेन में चल पड़ती है।
ट्रेन में उसी के डिब्बे में सफर कर रहे एक मुख्य सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए व्यक्ति से होती है जो उसे इंटरव्यू में सफल होने के टिप्स देते हैं और यह भी कहते हैं कि अब प्रशासक मालिक न होकर सिविल सर्वेंट कहलाते हैं और यह भी कि वे पद की लोलुपता में फँस कर अपनी शक्तियों और कर्तव्यों से विमुख होने लगे हैं।
कविता इंटरव्यू में भी सफल रही थी।

उपन्यासकार आज के भाग में तर्क-वितर्क के माध्यम से पाठकों के मस्तिष्क को शोधित कर देते हैं। कुछ संवादों के माध्यम से इसकी झलक देखिए:
- 'लड़का-लड़की दोनों को बराबर का हक है। मैं इस लिंग भेद को मिटा कर अपने मम्मी-पापा का नाम रोशन करूँगी। इसलिए मैं अगर शादी करूँगी तो वो होगी मेरे अपने कर्तव्यों से, मेरे अपने ईमान से, मेरे अपने उसूलों से और अपने देश की समृद्ध मर्यादाओं से।' (पृष्ठ 227)
कहना होगा कि लेखक ने यह बात ऐसे पात्र से कहलवाई है जो महिला है और उपन्यास की नायिका बन कर समाज की डोर को थामना चाहती है।
- 'एक शिक्षक देश और समाज के उत्थान में अधिक योगदान दे सकता है। एक अधिकारी का दायरा सीमित होता है जो कि उसके अपने विभाग के अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों तक ही सीमित होता है।' (पृष्ठ 229)
यहाँ लेखक के दिमाग की दाद देनी पड़ेगी। लगता है, इस उपन्यास को लिखने में लेखक को काफी चिन्तन-मनन से गुजरना पड़ा होगा।
- 'एक शिक्षक अपने सेवा-काल में न जाने कितनी अनगिनत भावी प्रतिभाओं के चरित्र निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान देता है, जो आगे चलकर स्वयं में एक शिक्षक का काम कर सकते हैं। समाज के निर्माण की चाबी शिक्षक के हाथ में है न कि प्रशासक के।' (पृष्ठ 229)
पुन: कहना होगा कि लेखक की यह बात बहुत ही सटीक बैठती है।
- 'एक राष्ट्र को महान उसकी शानदार राजधानी नहीं अपितु उसके श्रेष्ठ शिक्षक बनाते हैं।' (पृष्ठ 230)
लेखक ने यह वक्तव्य 1961 में यूएसए के तत्कालीन राष्ट्रपति का उद्धृत किया है जिसे सुनकर कविता निरुत्तर हो जाती है और उसे कहना पड़ता है कि यदि उसका चयन सिविल सेवा में नहीं होता है तो वह शिक्षक बनना पसंद करेगी।
- रिश्तेदारों की खुशी सबसे अधिक थी जो खुश न होते हुए भी उसके नाम से शोहरत पाने के लिए व्याकुल हो रहे थे। (पृष्ठ 237)
लेखक ने ऐसे रिश्तेदारों पर व्यंग्य किया है जो परिवार में कोई बड़ी सफलता प्राप्त करने पर ईर्ष्यावश अप्रसन्न होने के उपरांत भी अपनी मित्रमंडली के बीच परिवार के सफल व्यक्ति के नाम पर प्रसिद्धि के प्रयास में रहते हैं।
यह भाग निश्चित रूप से कहानी की मुख्य नायिका के कार्य की दिशा तय करता है।

समीक्षक : डाॅ.अखिलेश पालरिया, अजमे

Hindi Book-Review by Kishore Sharma Saraswat : 111962204
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