उन्हें चाय में दिलचस्पी थी
मुझे उसकी भाप में
और होटल और चाय के खेतों में
काम करने वाले लोगों में
वे समझते थे कि
माचिस की तीली से आग निकलती है
मुझे पता था कि
उससे जान निकलती है
वे कवि होना चाहते थे
मैं कविता लिखना चाहता था
उन्हें बोलने में भरोसा था
मैं चुप रहने में यक़ीन था
वे कहते थे कि
पेड़ों से छाँह मिलती है
मैं कहता था कि
पेड़ों से कुल्हाड़ियों के हत्थे बनते हैं
पलंग, कुर्सियाँ, घर के दरवाज़े
और शवों के लिए लकड़ियाँ मुहैया होती हैं
उनका मानना था कि
घर सोने के लिए जाया जाता है
मैं मानता था कि घर जागने के लिए है
और अपने कपड़े बदलने के लिए
और वहाँ से कहीं और जाने के लिए
वे आँखों और कनखियों पर मरते थे
मुझे आँखों से नश्तर चुभते थे
वे दर्द से दर्द का इलाज करते थे
मैं दर्द में कराहता और रोता था
वे मुफ़्त की रोटियाँ तोड़ते थे
मैं पहले रोटियाँ बनाता
फिर उन्हें बेचता
और फिर अपना पेट भरता था
वे कविताओं के लिए
चाँद, सूरज, पत्ते, फूल, प्रेम और नदियाँ चाहते थे
मुझे लिखने के लिए
चाक़ू, ख़ंजर और नफ़रत चाहिए
हमारे सोचने के तरीक़ों में
ज़मीन और आसमान का फ़र्क़ था
और यह फ़र्क़ हम दोनों को
इसी ज़िंदगी से मिला था