सबर ही जिहीसाब है बस यही सवाल है
झुठ पे झुठ औरा फिरी नाहक जबाल है
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दोस्ती या दुष्मनी, मिरे यू हलाक सबदू
सोबत ही सब यू है कि बला लाजवाब है
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बात तो चाद या चादगी ए सफर बतादू
माईक जाहिल षोर बस यही सजाल है
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सरक यू भीड़ गाफिल कबजा गले सटादू
अलसुबह अनजाने आसू जिन्दगी कंटाल है
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जांत पात बटाधार, हिस्बे दिख्या हटादू
सपने अपने तो अपने है साकी इंकलाब है
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ईमान रंगरेली, बुखार ए सदका जब कहदू
टाई मफलर मयखाना, शाम एक तलाभ है
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लफाजी बवाल, जिन्दगी नशासाज रहन करदू
ये हवाबाजी, सौदा ए कुर्सी, रहभर जंजाल है
"Contemplate the source of imagination and the divine spark within. In the depths of introspection, discover the limitless creativity of the Supreme Personality of Godhead dwelling within your soul. #DivineEssence #Imagination #Introspection "