जानते हो... जब प्रेम हुआ था तुमसे
तो अलग ही धुन में रहती थी
संगीत के जैसे सातों सुर बज उठते हों
मस्तिष्क में ,मन मयूर सा नृत्य करता हो
मन में अंजान तरंगों की लहरे उठती हो
जैसे एक अलग ही भाव उत्पन हो मन में
हर क्षण उत्साहित,चहकती रहती थी
पर जाने क्यों ?
तुम्हारे आने पर मौन धारण कर लेती थी
अधरों से तो कुछ बोल ना पाती थी
किंतु ये मेरा प्रेम से भरा ह्रदय सबकुछ
नयनों से कह जाता था
कितना मुश्किल था खुद को और अपने
प्रेम को बिखरने से पहले सम्हाल लेना
जाने किस धुन में रहती थी मैं तो
तेरे मीठे शब्दो के पीछे का सच
जरा भी ना देख पाती थी मैं तो....🍁
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