कुछ पूछो तो ही कुछ कुछ बताता है,
बाप हे, अपनी हद बखूबी जानता है ।
मां हे ममता का झरना , तो पिता समंदर है,
किनारो में समेटकर सबको पालता हे।
ना पीड़ा को गिनता ना अरमानों को नोचता ,
परिवार को खुशी में ही सब कुछ भूलता हे।
मां का गहना तो बच्चो का खिलौना हे कभी ,
गिड़गिड़ाता हे और जूक भी जाता है कभी।
पहले परिवार , बाद में खुद को ढूंढता है कभी,
रास्ता न मिले तो हार कर लोट जाता है कभी।
फिर भी न टूटता , ना बिखरता न ही मुड़ता कभी,
बाप हे , ना टूटने देगा ना बिखरने देता कभी।