सुप्रभात
हवा कुछ ऐसी चली कि मेरा निकाह हो गया
ना चाहते भी निकाह हो गया
पूरा घर मेरे ऊपर सवार हो गया
निकाह कर, सवाल इज्जत का
जबरदस्ती ऐसी हुई निकाह हो गया
ऐसा हुआ दिल पर पत्थर पड़ गया
निकाह भार बन गया
जो आए थे सब चले गए
अपने ढोल मजीरे भी साथ ले गए
मैं अकेला रह गया
दस साल में,
मैं सीनियर सिटीजन बन गया
मेरा निकाह हो गया