अपेक्षा या उम्मीद सिर्फ स्वयं से करें दूसरों से नहीं वरना यह आपके दुःख का कारण हो सकता है . जब आप दूसरे से अपेक्षा करते हैं तब आप अपनी ख़ुशी की चाभी दूसरे के हाथ में सौंप देते हैं . अगर वह आपकी अपेक्षा पर खरी नहीं उतरता है तब आपका दुखी होना निश्चित है .