तेरे मेरे दरमियाँ यह जहाँ क्यों है?
दर्द भी हम पर यूं महेरबाँ क्यों है?
भूल गए जो, उन्हें भूला दिया हमनें!
दिल पर फिर यादोंके निशाँ क्यों है?
निकले थे घरसे खुशीकी तलाशमें,
चारों और गमोंका कारवाँ क्यों है?
एक प्रेमदीप जो जलाया दिलमें तो,
बुझाने को बेकरार ये तूफाँ क्यों है?
हाथ जोड़कर तुम्हें पुकारा ऐ खुदा,
सुनता है तो बता तुं बेजुबाँ क्यों है?
जब नसीब में नहीं लीखा साथ उन्का,
तो आज भी उन्हींकी तमन्ना क्यों है?
मुक्कमल ही ना हुईं दास्ताँ ए इश्क़,
तो हर जुबां पे हमारी दास्ताँ क्यों है?
मैयत निकली क्या शान से हमारी?
देखकर "व्योम" सब परेशाँ क्यों है?
✍... © વિનોદ.મો.સોલંકી "વ્યોમ"
GETCO (GEB),
મુ. રાપર.