શીર્ષક - "हम रह गये अकेले"
दुनिया की इस भीड़ में भी, हम रह गये अकेले;
समाज की झुठी रीत में भी, हम रह गये अकेले;
हथेली पर अक्सर उनका नाम लीखा किया हमनें,
तो क्यों लीखी तकदीर में भी, हम रह गये अकेले?
अपने अल्फाज़ो को काग़ज़ पर उतार कर भी,
सजाई उस तस्वीर में भी, हम रह गये अकेले;
चल दिए बनाकर कारवां, पाने को हम मंजिल!
पाइ हुईं वह मंजिल में भी, हम रह गये अकेले;
कफ़न को भी चद्दर, बनाकर जब हम सो गए,
"व्योम" उस भरी निंद में भी, हम रह गये अकेले;
✍..© વિનોદ.મો.સોલંકી "વ્યોમ"
GETCO (GEB),
મુ. રાપર.