शहद बनने के लिए मधुमक्खी ही काममे आती है। बिना मधुमक्खी के शहद नहीं बन सकता। बिलकुल इसी तरह अगर हमें किसी इन्सान को सुधारना है तो उसे थोड़ा टोकना भी पड़ेगा और उसे थोड़े कटु वचन भी सुनाने पड़ेंगे। कभी कभी किसीको सीधी तरह से नहीं अपितु उसके स्वभाव से उल्टा जाकर ही सुधारा जा सकता है।