मै ले पाती न नाम तेरा ,
न कर पाती मंत्र ,साधना |
मुझसे न निभते नीयम है ,
न ही जानू आसन मैय्या |
बस इतना जानूँ माँ मेरी,
तेरा आँचल ही पहचानूँ ,
कण-कण मे शब्द भरी है तू,
साँसो मेरे भर दो न!
आसन बन जाये हृदय मेरा ,
मन को अब माला कर दो माँ |
कण्ठ से केवल तू निकले ,
जिह्वा पर तू कुछ भी बोले ,
बस इतना करना माँ मेरी
सगरो जग का कल्याण रहे ,
कुछ भी अपशब्द नही निकले ,
जब शुभ बोलूँ तब नाम रहे |
🙏