जिंदगी की रफ्तार का
तो पता नहीं मगर
मैं उस एक शख्स को
साथ लेने के लिए
कभी कभी इतना तेज
दौड़ लेता हूं
कि वो साथ हो जाए और
कभी कभी इतना धीमा चल लेता हूं
कि वो मेरे साथ हो जाए
मगर फिर भी हम एक नहीं हो पाए
न कभी सुकून
से वो मुझसे मिली और
न कभी मुझे फुर्सत मिली
बस एक दूसरे के साथ के लिए
बैचेन हुए बैठे...
-Prahlad Pk Verma