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*मोदी की लाठी और कांग्रेस की तिलमिलाहट ......*…
*कहते हैं कि भगवान की लाठी बेआवाज होती है* कुछ इसी तरह मोदी जी की लाठी भी बेआवाज होती है पर बहुत गहरी चोट पहुंचाती है *वैसे तो यह खबर आप अंबेडकर जयंती १४ अप्रैल को सुनेंगे पर इसकी पृष्ठभूमि अभी जान लीजिए* हुआ यह था कि १९४७ में आजादी के बाद तत्कालीन वायसराय हाउस राष्ट्रपति आवास बना दिया गया उसके बाद क्षेत्रफल और साज-सज्जा के अनुसार दूसरे नंबर पर तीन मूर्ति भवन था *जवाहर लाल नेहरू ने इसे अपना आवास बना लिया*।
*अगले १७ वर्षों तक सारे कर्म कुकर्म इसी भवन में करते रहे* उनकी गुप्त रोग से मृत्यु होने पर दूसरे प्रधानमंत्री श्री लाल बहादुर शास्त्री जब तीन मूर्ति भवन में जाने लगे तो इंदिरा गांधी ने रोक दिया *कहा कि आपकी हैसियत नेहरू के भवन में रहने लायक नहीं है* सीधे-सादे शास्त्री जी मान गए और अपने लिए एक बहुत छोटा सा बंगला चुना और वहीं रहने लगे *उनकी रहस्यमय असामयिक मृत्यु के बाद तीन मूर्ति भवन को इंदिरा गांधी ने नेहरू संग्रहालय बना दिया* इसमें उनका गद्दा तकिया रजाई चश्मा घड़ी और उनकी ऐयाशी के तमाम सारे सामान *जिसमें एडविना की फोटो भी थी* लगा दिया *बाद में जितने प्रधानमंत्री आए किसी का कोई संग्रहालय नहीं बना*।
*पीवी नरसिम्हा राव को तो इतना बेइज्जत किया कि उनका अंतिम संस्कार तक दिल्ली में नहीं करने दिया क्योंकि वे* इंदिरा गांधी के गुलाम नहीं थे *समय बीतता गया* प्रधानमंत्री आते गए और सबके बंगले सुरक्षित होते रहे *इसी समय राजनीति के फलक पर एक सितारे का उदय हुआ जिसे सब नरेंद्र मोदी के नाम से जानते हैं*।
उन्होंने बिना हल्ला गुल्ला किये खामोशी से काम शुरू कर दिया *तीन मूर्ति भवन के एक एक करके सारे १८ कमरे खुलवा दिए* और उनमें सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की स्मरणीय वस्तुओं को रखवाकर उनके नाम से अलग अलग संग्रहालय बनवा दिया *अब बारी थी जवाहर लाल नेहरू का नाम मिटाने की*।
अब तक इसका नाम केवल *"जवाहरलाल नेहरू संग्रहालय तीन मूर्ति भवन दिल्ली"* था देश का ये *प्रधान-सेवक श्री नरेंद्र मोदी जी* ने अब *जवाहर लाल नेहरू शब्द हटाकर* इसका नया नामकरण कर दिया *"प्रधानमंत्री संग्रहालय"* जिसका विधिवत उद्घाटन आगामी दिनांक *१४-०४-२०२२* करेंगे ।
*😊कांग्रेस में इसीलिए पीड़ा बढ़ गई है* रो भी नहीं सकती *हंसने का तो सवाल ही नहीं उठता 🙃 😥!!!!!!!!!*